सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

जनवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दर्द भरी शायरी | इल्ज़ाम, ख़ामोशी, बेवफ़ाई और अधूरी मोहब्बत की शायरी 2026

1. हर सज़ा मंज़ूर थी, मगर बेगुनाह क्यों ठहराया हर सजा मंजूर है अगर मैं कहीं गलत था तेरे हर फैसले से मुझे कोई एतराज ना था बस एक बात दिल को आज भी चुभती रही बिना मेरी खता जान तुमने मुझे गुनहगार ठहरा दिया। 2. रिश्ता टूटा तो कसूर किसका था चलो मैंने मान लिया गलती मेरी है हर इल्जाम, हर सजा मुझे मंजूर है बस एक सवाल का जवाब आज तक नहीं मिला अगर तुम बेगुनाह थे तो ये हमारा रिश्ता टूट किस वजह से था। 3. मुस्कुराहट के पीछे हर रोज़ बिखरता दिल बिखर जाता हूं मैं तेरी हरकतों को देखकर फिर भी हर बार खुद को समेट लेता हूं तुम्हें शायद मेरे दर्द का एहसास नहीं मैं मुस्कुराकर भी हर रोज टूट जाता हूं। 4. थोड़ा-थोड़ा ज़हर देकर रिश्ता तोड़ दिया ये जख्म एक दिन के नहीं है थोड़ा-थोड़ा हर रोज जहर मिलाया गया जिसे अपना समझकर हम दर्द सहते रहे उसी ने मुस्कुरा कर हमें हर बार आजमाया। 5. ख़ामोशियों की भी अब ज़ुबान समझ आने लगी है उनसे अच्छी जान पहचान हो गई है अब उनकी खामोशियां भी समझ आने लगी हैं जो बातें कभी कह नहीं पाते थे वो अब निगाहें से बयान होने लगी है। 6. मेरी चाहतों का आखिर क्या होगा अगर यूं खामोश रही निगाहें तो मेरी चा...

मुझे मालूम है खूबसूरत दिखने के लिए

 मुझे मालूम है खूबसूरत दिखने के लिए अपनी जुल्फों को सवार ती हो तारीफ तेरे हुस्न का लोग करते नहीं थकते हैं जिसकी मुकद्दर में लिखी हो उसकी नसीब अच्छी है

तुम्हारी मस्तानी आंखों में डूब जाना चाहते हैं

तुम्हारी मस्तानी आंखों में डूब जाना चाहते हैं बस अपना इरादा थोड़ा और खोलकर बता दो दूरियां अब मुझे बर्दाश्त नहीं होती अपने प्यार का जाम मुझको पिला दो

कोई आप से सच्ची मोहब्बत करें

कोई आप से सच्ची मोहब्बत करें तो उसकी मोहब्बत को ठुकराया नहीं करते वैसे तो हम ऐसे इंसान हैं कि कोई मुझे प्यार ना करें तो हम भी बेमतलब किसी के प्यार में वक्त बर्बाद नहीं करते