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दर्द भरी शायरी | इल्ज़ाम, ख़ामोशी, बेवफ़ाई और अधूरी मोहब्बत की शायरी 2026

1. हर सज़ा मंज़ूर थी, मगर बेगुनाह क्यों ठहराया हर सजा मंजूर है अगर मैं कहीं गलत था तेरे हर फैसले से मुझे कोई एतराज ना था बस एक बात दिल को आज भी चुभती रही बिना मेरी खता जान तुमने मुझे गुनहगार ठहरा दिया। 2. रिश्ता टूटा तो कसूर किसका था चलो मैंने मान लिया गलती मेरी है हर इल्जाम, हर सजा मुझे मंजूर है बस एक सवाल का जवाब आज तक नहीं मिला अगर तुम बेगुनाह थे तो ये हमारा रिश्ता टूट किस वजह से था। 3. मुस्कुराहट के पीछे हर रोज़ बिखरता दिल बिखर जाता हूं मैं तेरी हरकतों को देखकर फिर भी हर बार खुद को समेट लेता हूं तुम्हें शायद मेरे दर्द का एहसास नहीं मैं मुस्कुराकर भी हर रोज टूट जाता हूं। 4. थोड़ा-थोड़ा ज़हर देकर रिश्ता तोड़ दिया ये जख्म एक दिन के नहीं है थोड़ा-थोड़ा हर रोज जहर मिलाया गया जिसे अपना समझकर हम दर्द सहते रहे उसी ने मुस्कुरा कर हमें हर बार आजमाया। 5. ख़ामोशियों की भी अब ज़ुबान समझ आने लगी है उनसे अच्छी जान पहचान हो गई है अब उनकी खामोशियां भी समझ आने लगी हैं जो बातें कभी कह नहीं पाते थे वो अब निगाहें से बयान होने लगी है। 6. मेरी चाहतों का आखिर क्या होगा अगर यूं खामोश रही निगाहें तो मेरी चा...

वह मीठी-मीठी बातों से

वह मीठी-मीठी बातों से मन को लुभाती है उसके करीब रहकर मन को खुशी मिलती है


 कुछ ऐसा कर दो मेरे मन को तुम्हारे प्यार की आस बाकी न रहे 


उम्र भर अपने प्यार का जाम पिलाती रहना इसका नशा कभी उतरने न देना ज़िंदगी तुम्हारे नाम कर दिया हैं 


हर बातें खुलकर कह दिया होता शक के घेरे में रहकर तन्हा जिना नही पड़ता 


अपने मन कि करते हैं अपने दिल कि सुनते हैं यह कारण हर वक़्त ख़ुश रहते हैं 


हर सपने हक़ीकत में बदलते गए मेहनत रंग लायी उम्मीद को पहचान मिल गयी हैं 


आसमान तक उड़ने कि ख़्वाहिश सच हो गयी हैं यह सही है हौसला से उड़ान संभव हैं 


 तुम्हारे एहसान को चुका नहीं सकता कोशिश करूंगा हरदम तुम्हारा साथ दे पाए

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