1. हर सज़ा मंज़ूर थी, मगर बेगुनाह क्यों ठहराया हर सजा मंजूर है अगर मैं कहीं गलत था तेरे हर फैसले से मुझे कोई एतराज ना था बस एक बात दिल को आज भी चुभती रही बिना मेरी खता जान तुमने मुझे गुनहगार ठहरा दिया। 2. रिश्ता टूटा तो कसूर किसका था चलो मैंने मान लिया गलती मेरी है हर इल्जाम, हर सजा मुझे मंजूर है बस एक सवाल का जवाब आज तक नहीं मिला अगर तुम बेगुनाह थे तो ये हमारा रिश्ता टूट किस वजह से था। 3. मुस्कुराहट के पीछे हर रोज़ बिखरता दिल बिखर जाता हूं मैं तेरी हरकतों को देखकर फिर भी हर बार खुद को समेट लेता हूं तुम्हें शायद मेरे दर्द का एहसास नहीं मैं मुस्कुराकर भी हर रोज टूट जाता हूं। 4. थोड़ा-थोड़ा ज़हर देकर रिश्ता तोड़ दिया ये जख्म एक दिन के नहीं है थोड़ा-थोड़ा हर रोज जहर मिलाया गया जिसे अपना समझकर हम दर्द सहते रहे उसी ने मुस्कुरा कर हमें हर बार आजमाया। 5. ख़ामोशियों की भी अब ज़ुबान समझ आने लगी है उनसे अच्छी जान पहचान हो गई है अब उनकी खामोशियां भी समझ आने लगी हैं जो बातें कभी कह नहीं पाते थे वो अब निगाहें से बयान होने लगी है। 6. मेरी चाहतों का आखिर क्या होगा अगर यूं खामोश रही निगाहें तो मेरी चा...
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वफा के बदले बेवफाई मिली है मैं सच्चाई पर कायम रहा और तनहाई मिली है हर हाल में साथ रहने का वादा टूटा है मुझे जुदाई मिली है
हजार वादों को तोड़कर, इमोशनल ब्लैकमेल कर, गजब का चूना लगा कर गई है हकीकत में अब कुछ बचा ही नहीं है फिर भी ना जाने क्यों मेरा दिल मानने को तैयार है ही नहीं वह बेवफा हो गई है
उसकी बेवफाई का गम ना सहा जा रहा है ना जिया जा रहा है ना मरा जा रहा है हालत कुछ यूं हो गई है मेरा तन्हाई में सब कुछ लुटा जा रहा है
उम्र भर साथ निभाने का वादा था आखिरी सांस तक एक दूजे को साथ जाना था बेवफाई का दर्द कुछ इस तरह मिला है एक झटके में लुट गया जो अपनी ख्वाहिशों का खजाना था